‘सामना’ : राजीव गांधी के अपमान के बिना भी हो सकता था मेजर ध्यानचंद का सम्मान

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राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने के केंद्र सरकार के फैसले की शिवसेना ने आलोचना की है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा गया है कि राजीव गांधी के योगदान का अपमान किए बिना भी मेजर ध्यानचंद को सम्मानित किया जा सकता था।

सामना में यह भी लिखा गया है कि,”ध्यानचंद के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। मेजर ध्यानचंद व उनका क्रीड़ा क्षेत्र में योगदान बड़ा ही है। वे एक अच्छे इंसान थे और पंडित नेहरू से उनका घनिष्ठ संबंध था। इसलिए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले राजीव गांधी का नाम मिटाकर वहां मेजर ध्यानचंद का नाम लगाना यह ध्यानचंद का भी बड़ा गौरव है, ऐसा नहीं माना जा सकता है। राजीव गांधी का नाम नहीं चाहिए, इसलिए ध्यानचंद का नाम देना, यह द्वेष की राजनीति है।”

केंद्र के फैसले पर ‘सामना’-

शिवसेना मुखपत्र सामना में यह भी लिखा गया है कि, ”ध्यानचंद के नाम पर और एक बड़ा पुरस्कार घोषित किया जा सकता था। वैसा हुआ होता तो मोदी सरकार की वाहवाही ही हुई होती। अब भाजपा के राजनैतिक खिलाड़ी ऐसा कह रहे हैं कि ‘राजीव गांधी ने कभी हाथ में हॉकी का डंडा पकड़ा था क्या?’”

सामना में आगे लिखा गया है कि, ”इंदिरा गांधी की आतंकवादियों ने हत्या की। राजीव गांधी को भी आतंकवादी हमले में जान गंवानी पड़ी। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ के रूप में नामकरण करना, यह जनभावना न होकर इसे राजनीतिक ‘खेल’ कहना होगा। राजीव गांधी के बलिदान का अपमान किए बिना भी मेजर ध्यानचंद को सम्मानित किया जा सकता था। हिंदुस्तान ने वह परंपरा और संस्कृति खो दी है। आज ध्यानचंद को भी वैसे खराब ही लग रहा होगा।”

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-Adv-

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