पहली बार 81 पार… अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया

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भारतीय रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 38 पैसे गिरकर 81.24 के ऑल-टाइम लो पर आ गया. इसका कारण आयातकों की डॉलर की मांग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से बढ़ाई गई ब्याज दरें है. एशियन करेंसीज में लंबे समय तक आउटपरफॉर्म करने के बाद रुपया गुरुवार को एशियन पीर्स के बीच सबसे सबसे बड़ा लूजर रहा. ब्लूमबर्ग के अनुसार, गुरुवार को रुपया 80.86 पर बंद हुआ था और आज 81.06 पर खुला था. रुपए की 52 वीक रेंज 73.61-81.24 रही है.

यूएस ट्रेजरी यील्ड्स के कई साल के हाई पर पहुंचने और इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की ऊंची डिमांड के कारण रुपये में यह गिरावट आई है. रुपये में गुरुवार को फरवरी के बाद से सबसे बड़ी सिंगल सेशन पर्सेंटेज गिरावट आई थी. यूएस डॉलर इंडेक्स 111 की रेंज के ऊपर बना हुआ है. वहीं, यूएस बॉन्ड यील्ड्स में 4.1 पर्सेंट का उछाल आया है.

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ट्रेडर्स का कहना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से आक्रामक तरीके से दखल न दिए जाने और यूएस फेडरल रिजर्व के रेट आउटलुक के कारण रुपये में गिरावट देखने को मिली है. 10 साल की अवधि वाले यूएस ट्रेजरी यील्ड में 3.70 पर्सेंट और दो साल वाले ट्रेजरी यील्ड में 4.16 पर्सेंट का उछाल आया है.

यूएस डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को 80.86 रुपये के रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ था. वहीं, बुधवार को रुपया 79.97 के स्तर पर था. डॉलर इंडेक्स शुक्रवार को 111.35 के स्तर पर लगभग फ्लैट रहा, यह दो दशक के अपने हाई 111.81 के करीब रहा. डॉलर इंडेक्स गुरुवार को इस स्तर पर पहुंचा था. एशियन करेंसीज में गुरुवार को रुपया सबसे ज्यादा गिरावट वाली करेंसीज में रहा.

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एनालिस्ट्स का कहना है कि रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है. सीआर फॉरेक्स ए़डवायजर्स ने एक नोट में कहा है कि शॉर्ट टर्म में रुपया नए लो को टेस्ट कर सकता है. हमारा मानना है कि आने वाले समय में रुपया 81.80 से 82 रुपये तक जा सकता है.

रुपए में गिरावट का मतलब अमेरिका में घूमना और पढ़ना महंगा होना है. मान लीजिए कि जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 50 रुपए में 1 डॉलर मिल जाते थे. अब 1 डॉलर के लिए छात्रों को 81 रुपए खर्च करने पड़ेंगे. इससे फीस से लेकर रहना और खाना और अन्य चीजें महंगी हो जाएंगी.

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