कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर विवाद हाल के वर्षों में चर्चा का विषय रहा है. आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त की है, जो भारतीय कानून के अनुसार स्वीकार्य नहीं है.
25 नवंबर 2024 को हुई सुनवाई में, उच्च न्यायालय ने गृह मंत्रालय से इस मामले में कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि 19 दिसंबर 2024 तक अंतिम निर्णय लेकर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. केंद्र सरकार ने इससे पहले कोर्ट को बताया था कि यह मामला सक्रिय विचाराधीन है, लेकिन अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार से अब तक की गई कार्यवाही का ब्योरा 24 मार्च तक पेश करने को कहा था, जिसकी सुनवाई आज होगी.
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क्या है नागरिकता विवाद?
राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर यह विवाद तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका दायर की. इसमें दावा किया गया कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में एक कंपनी के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश नागरिक के रूप में दर्ज कराया था. याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की.
वहीं कांग्रेस ने इस विवाद को राजनीतिक साजिश बताया है. पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं ताकि उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा सके.
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नागरिकता संबंधी नियम
भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है. यदि कोई भारतीय नागरिक किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, गलत जानकारी देने या नागरिकता छिपाने पर पांच साल की सजा और 50,000 रुपये जुर्माना का प्रावधान है.
यदि राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता साबित होती है, तो उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जा सकती है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. इससे न केवल उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती है, बल्कि आगे चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है.