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…यहां आज भी जंजीर से बंधता है ट्रेन का पहिया

देश को आजाद हुए कितने वर्ष हो गए है, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सब जानते हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सराय भूपत रेलवे स्टेशन पर आज भी अंग्रेजों के बनाए रेलवे नियमों का पालन होता है। यहां पर आपको देखने को मिलेगा कि ट्रेनों को सुरक्षित रखने के लिए बोगी में बाकायदा ताले लगाकर जंजीर से बांध कर रखा जाता है। इसके लिए विशेष तौर पर दो कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जाती है।

अंग्रेजों की परंपरा का निर्वाहन

सराय भूपत रेलवे स्टेशन अधीक्षक मोहम्मद अहवाल के मुताबिक, दरअसल अंग्रेजों के जमाने में ट्रेन में पांच से छह बोगियां ही होती थीं। ऐसे में आंधी, तूफान अथवा भूकंप आने पर उसके लुढ़कने का खतरा बना रहता था। इस वजह से ट्रेन के एक पहिए को बांधने का नियम बना था। समय के साथ दूसरे स्टेशनों पर इस नियम की अनदेखी होने लगी। लेकिन आज भी सराय भूपत रेलवे स्टेशन पर इस नियम का पालन होता है।

सभी ट्रेनों में बंधती हैं जंजीरें

यहां रुकने वाली सभी गाड़ियों (सवारी गाड़ी हो या फिर 120 बोगियों की मालगाड़ी) में स्टेशन अधीक्षक या स्टेशन मास्टर की निगरानी में पोर्टर किसी एक पहिए को जंजीर से पटरियों से बांधकर ताला लगाता है। यही नहीं उस पहिए के दोनों ओर दो लकड़ी की गिट्टक भी लगाते हैं। जिसके बाद जब ट्रेन रवाना होने को होती है तो लोको पायलट व गार्ड को ट्रेन ताला खोल कर सौंप दी जाती है। इस काम को बाकायादा रेलवे के दस्तावेजों में इंद्राज भी किया जाता है और स्टेशन मास्टर कक्ष में रखे स्टेबल रजिस्टर में इसे दर्ज किया जाता है।

दो कर्मचारियों की लगती है ड्यूटी

सराय भूपत रेलवे के स्टेशन पर इसके लिए विशेष तौर पर पोर्टर दिनेश कुमार एवं राजेश कुमार की ड्यूटी लगती है। पोर्टरों का कहना है कि उन्हें स्टेशन अधीक्षक का आदेश मिला है। वर्षों से पहिए को एक जंजीर से बांध कर ताला लगाते आ रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पूर्व से चली आ रही व्यवस्था को वह अपनी मर्जी से खत्म नहीं कर सकते हैं। जब तक बोर्ड से आदेश नहीं मिलेगा तब तक नियम का पालन होता रहेगा।

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