इतिहास के पन्नो से निकली ‘मास्क’ की कहानी

इतिहास गवाह है कि मास्क ने लोगों को अपने से दूर नहीं जाने दिया है। ब्लैक प्लेग, स्पैनिश फ़्लू, स्मॉग, प्रदूषण और ऐसे कई कारण है जिसकी वजह से हम मास्क के इतिहास को याद करते सकते है।

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‘अगर बाहर निकलना है, तो मास्क ज़रूरी है।’ कोरोना के इस दौर में अब ये “न्यू नॉर्मल” बन चुका है। लेकिन क्या मास्क का इतिहास मे कभी ज़िक्र किया गया है? कोरोना से पहले इसे लगाने वाले सिर्फ़ डॉक्टर, या जापानी पर्यटक ही हुआ करते थे। मास्क का इस्तेमाल सामान्य ज़रूर है लेकिन इतना नया भी नहीं है। ‘जान है तो जहान है’ इसकी चेतावनी बखूबी मास्क न लगाने वालों को कोरोना के दौर में मिल रही है। क्यूँकि इस दौर में  “दो गज दूरी और मास्क है ज़रूरी।”

इतिहास गवाह है कि मास्क ने लोगों को अपने से दूर नहीं जाने दिया है। ब्लैक प्लेग, स्पैनिश फ़्लू, स्मॉग, प्रदूषण और ऐसे कई कारण है जिसकी वजह से हम मास्क के इतिहास को याद करते सकते है। लंदन में इसका इतिहास 500 साल पुराना है।

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नौकरों की दिया था मास्क

इतिहास में  इसकी ज़रूरत एक रुतबे का सिम्बल भी बन चुकी थी। मार्को पोलो जिन्होंने ने दुनिया घूम के सिल्क रोड की खोज की थी उनका कहना था कि ” 13वीं सदी के चीन में नौकरों के स्कार्फ़ में ही मास्क बुन के दिया जाता था।” इसके के पीछे धारणा ये थी कि, किसी के साँस की वजह से राजा के खाने में उसकी ख़ुशबू और स्वाद में कोई दिक़्क़त न आ जाए। इतना ही पढ़ के आपको इसका इतिहास बेहद रोचक लग रहा होगा।

ब्लैक प्लेग में भी कारगर था

14वीं सदी में ब्लैक प्लेग सबसे पहले यूरोप में फैलना शुरू हुआ. 1347 से 1351 के बीच इस बीमारी की वजह से 250 लाख लोगों की मौत हो गई.  इसके बाद डॉक्टर ख़ासतौर पर मेडिकल मास्क का इस्तेमाल करने लगे थे।

मास्क
ब्लैक प्लेग के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाला मास्क

ब्लैक प्लेग में इस्तेमाल किए जाने वाले मास्क को ख़ुशबूदार जड़ीबूटियों से भरा जाता था। इससे वो गंध जोकि शरीर में जाके असंतुलन पैदा कर सकती है, वो अंदर न जा पाए। 1665 के दौर में आए ग्रेट प्लेग के दौरान मरीज़ों का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कई अलग-अलग तरह के चीजों का उपयोग करना शुरू किया। जैसे: चमड़े से बना ट्यूनिक, आंखों पर कांच के चश्मे, हाथों में ग्लव्स और सिर पर टोपी पहना करते थे. वह उस दौर का पीपीई किट था।

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मास्क ने ही स्पैनिश फ़्लू से बचाया

पहला वर्ल्ड वार ख़त्म होते ही दुनिया के सामने एक नई मुसीबत आके खड़ी हो गई थी। स्पेन से शुरू हुए इस फ़्लू ने धीरे-धीरे एक महामारी का रूप ले लिया था। ये  महामारी एक बड़े स्तर तक फैलती चली गई। विश्व युद्ध से लौट रहे सैनिकों से दुनिया भर में स्पैनिश फ़्लू फैलती चली गई। संक्रमण का दर तेज़ी से बढ़ता चला गया और उसी दर से बढ़ता चला गया मौतों का आँकड़ा।

मास्क
स्पैनिश फ़्लू

इस महामारी का अंत भी मास्क लगाने और सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करने से हुआ। लोगों को दूरी बनके रखने की सलाह दी गई।

ये कुछ मुख्य तिथियाँ थी जब मास्क का इस्तेमाल मनुष्य को बचाने के लिए किया गया था। हालाँकि ऐसे कई सारे क़िस्से है जो हमें इतिहास में इसकी ज़रूरत से रूबरू कराते है। जैसे कि लंदन में प्रदूषण बढ़ने के वजह से इसे फिर से कई सालों बाद उपयोग में लाया गया था। रासायनिक हमलों में मास्क ने लोगों के अमूल्य जीवन को बचाया है।

तो ऐसा नहीं है कि मास्क का प्रचलन अभी बढ़ा है, बल्कि ये तो हमसे भी पुराना हो सकता है। अब जब मास्क हम सबकी ज़रूरत है तो लाज़मी है कि इसका इतिहास भी रोचक ही होना चाहिए।

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