नरेंद्र मोदी बर्थडे: पिछले 8 सालों से पीएम के रूप में संभाल रहे देश की बागडोर, कुछ इस तरह से आये राजनीति की ओर

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शनिवार यानि 17 सितंबर को देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन के 72वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं. आज वो अपना जन्मदिन मना रहे हैं. देश की बागडोर अपने हाथों में लिए पीएम मोदी को 8 साल हो चुके हैं. उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ सत्ता में वापसी की और आज भी काबिज हैं. पीएम मोदी का जीवन काफी संघर्षों भरा रहा है. उन्होंने अपने 72 सालों के सफर में कई उतार-चढ़ाव देखें हैं. भारत का शायद ही ऐसा कोई कोना बचा हो जहां वह घूमे न हो. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियों को भी निभाया है. ऐसा भी कहा जाता है कि अपने बचपन में वो ट्रेन के डिब्बों में चाय बेचा करते थे.

आइए जानते हैं नरेंद्र मोदी कैसे बने पीएम नरेंद्र मोदी…

1- पीएम नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सिंतबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था. पीएम मोदी की मां का नाम हीराबेन और पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था. पीएम मोदी के पिता चाय बेचते थे, पीएम मोदी खुद गुजरात के महेसाणा रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता की मदद किया करते थे. उनकी मां उनका हाथ बंटाने के लिए दूसरों के घरों में बर्तन मांजती थी. पीएम मोदी खुद बता चुके हैं कि साल 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजरने वाले सैनिकों को चाय पिलाई थी. वह सैनिक स्कूल में पढ़ना चाहते थे लेकिन पढ़ नहीं सके. यहीं से उनके मन में संन्यास की इच्छा पनपने लगी थी.

2- पीएम मोदी की जब 18 साल के थे तो उनकी शादी करा दी गई. उनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन मोदी है. हालांकि, पीएम मोदी को गृहस्थ जीवन रास नहीं आया और वो अपनी पत्नी सहित घर-बार छोड़कर सन्यास की राह थाम ली. वह देश के पूर्वी हिस्से लेकर उत्तर-पूर्व भारत तक भ्रमण करते रहे. पीएम मोदी ने इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर वहां की संस्कृतियों को समझा. पीएम मोदी अलग-अलग मठों में भी जाते रहे. स्वामी विवेकानंद के वेलूर मठ, असम में सिलिगुड़ी और गुवाहाटी, अल्मोड़ा के अद्वैत आश्रम और राजकोट के रामकृष्ण मिशन में भी पीएम मोदी ने अपना समय बिताया. वो अध्यात्म में भटकते रहे लेकिन उनके भाग्य में सन्यास नहीं था.

3- पीएम मोदी के कर्तव्यबोध ने उन्हें सन्यासी नहीं बनने दिया. वह देश से लौटकर अपने गृह राज्य गुजरात आए और उसके बाद उन्हें सार्वजनिक जीवन में उतना पड़ा. पीएम मोदी ने यहां से अपनी छूटी हुई पढ़ाई शुरू की और राजनीति शास्त्र में एमए किया. उन्होंने साल 1967 में संघ की सदस्यता ले ली और संघ के प्रचारक बने रहे. यहीं से उनकी भारत को लेकर समझ गहरी होती गई और देखते-देखते वह ब्रांड मोदी बन गए.

4- साल 1967-1971 तक पीएम मोदी स्वयं सेवक के तौर पर वह देश के लिए काम करते रहे. वह साल 1971 में हुए दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जनसंघ के सत्याग्रह में शामिल हुए थे. पीएम मोदी को राजनीतिक कैदी के तौर पर तिहाड़ जेल में भी कुछ दिन बिताने पड़े थे. इमरजेंसी के दौरान पीएम मोदी राजनीतिक तौर पर बेहद सक्रिय हो गए थे. इमरजेंसी के खिलाफ वो बेहद मुखर होकर विरोध करते रहे. इस दौरान वो कभी सन्यासी तो कभी सिख बनते रहे. वह छिपकर इमरजेंसी के खिलाफ सरकार की आलोचना जनता तक पहुंचाते रहते थे.

6- इमरजेंसी ने पीएम मोदी को नई दिशा दी. साल 1979 में पीएम मोदी दिल्ली ठहर गए. उनकी साल 1985 में संघ से विदाई हुई और उन्हें भाजपा भेज दिया गया. साल 1987 में अहमदाबाद नगर निगम चुनाव हुआ और मोदी के नेतृत्व में भाजपा विजयी हुई. यही साल था जब वह गुजरात भाजपा के संगठन सचिव बन गए.

7- संगठन सचिव के तौर पर नरेंद्र मोदी ने गुजरात में कई अनोखे प्रयोग किए. उन्होंने स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी कराई. मोदी यह जानते थे अगर लोगों को बांधकर रखना है तो उन्हें सुनना पड़ेगा. साल 1990 में जब दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा कर रहे थे तो उसकी कमान मोदी के हाथ में थी.

8- साल 1995 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में मोदी का भी अहम रोल रहा, तभी उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया. साल 1998 के चुनावों में भाजपा की जीत का श्रेय भी नरेंद्र मोदी को दिया गया. धीरे-धीरे भाजपा में नरेंद्र मोदी का कद बढ़ता गया. साल 2001 में वह पहली बार गुजरात के सीएम बने. वह विपक्षी पार्टियों के लिए अजेय बने रहे. साल 2014 तक उन्होंने गुजरात की सत्ता संभाली.

9- पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़े गए चुनाव को जीतना विपक्ष के लिए मुश्किल हो गया है. साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उनके नेतृत्व में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला. साल 2019 के चुनाव में भी उन्हीं के नेतृत्व में जीत मिली.

10- मोदी लहर कुछ ऐसी रही कि लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों तक भाजपा ही चुनाव जीत रही है. यूपी से लेकर गोवा तक भाजपा अजेय बनी हुई है. भाजपा के लिए चुनाव कहीं भी हो चेहरा नरेंद्र मोदी होते हैं. मोदी मैजिक के आगे सारे फैक्टर्स फीके पड़ गए हैं.

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