घर घर ढूंढें जाएंगे टीबी रोगी

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-20 प्रतिशत लक्षित आबादी में खोजे जाएंगे मरीज
– 22 मार्च तक चलेगा टीबी एसीएफ अभियान
– घनी आबादी, ईंट भट्टे, दूर दराज के क्षेत्रों, अनाथालय पर होगा ज़ोर
– 155 टीमें व 31 पर्यवेक्षक अभियान के लिए होंगे तैनात
– डीटीओ, एमओ डीटीसी व जिला क्षय रोग केंद्र करेंगे मोनीटरिंग व निरीक्षण

टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनपद में कई गतिविधियां की जाएंगी। इस क्रम में जिले में नौ मार्च से टीबी सक्रिय रोगी खोज (एक्टिव केस फ़ाइंडिंग-एसीएफ़) अभियान शुरू किया जाएगा। यह अभियान 22 मार्च तक चलेगा। अभियान के तहत जनपद की 20 प्रतिशत लक्षित आबादी के बीच टीबी के नए रोगी खोजे जाएंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि अभियान की सफलता के लिए विभाग व जिला क्षय रोग केंद्र ने तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। अभियान के दौरान प्रमुख रूप से घनी आबादी, मलिन बस्ती, ईंट-भट्टे, दूर दराज के क्षेत्रों, अनाथालय, जेल, अल्पसंख्यक समुदाय पर पूरा ज़ोर दिया जाएगा, क्योंकि इन जगहों पर टीबी मरीजों के मिलने की संभावना अधिक रहती है। इसके साथ ही टीबी रोग के प्रति जनजागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और संवेदीकरण किया जाएगा।

घर-घर जाएगी टीम

जिला क्षयरोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राहुल सिंह ने बताया कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में नौ से 22 मार्च तक एसीएफ़ अभियान चलेगा। 10 कार्यदिवसों में अभियान के तहत जनपद की कुल जनसंख्या के सापेक्ष 20 प्रतिशत (लगभग 5.15 लाख) आबादी के बीच नए टीबी मरीजों को खोजा जाएगा। इस दौरान टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी। टीबी के संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर स्पूटम एकत्रित कर जांच के लिए भेजेंगी। जांच में पॉज़िटिव आने पर नोटिफिकेशन कर तुरंत उपचार रखा जाएगा, जिससे उन्हे निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज पूरा होने तक हर माह 500 रुपये का लाभ भी मिल सके।

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टीमों की होगी मॉनिटरिंग व निरीक्षण

डॉ सिंह ने बताया कि अभियान के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कुल 155 टीमें व 31 पर्यवेक्षण तैनात किए जाएंगे। इन टीमों में आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी, उप जिला क्षय रोग अधिकारी, मेडिकल आफिसर जिला क्षय रोग केंद्र (एमओडीटीसी) सहित जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) संजय चौधरी, जिला पीपीएम समन्वयक (डीपीपीएमसी) नमन गुप्ता, डीपीटीसी विनय मिश्रा व टीबी स्वास्थ्य पारिदर्शक (एचवी) वीपी ओझा, टीमों की मॉनिटरिंग व निरीक्षण का कार्य करेंगे। उन्होने बताया कि एसीएफ टीमों की माइक्रोप्लानिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

जिले में टीबी रोगी

वर्ष 2020 में 9,760 क्षय रोगियों को नोटिफ़ाई किया गया जिसमें से 6,081 सरकारी अस्पतालों तथा 3,679 निजी अस्पतालों से हुआ है। वहीं वर्ष 2021 में कुल 12,485 क्षय रोगियों को नोटिफ़ाई किया गया जिसमें से 7,434 सरकारी अस्पतालों एवं 5,051 निजी अस्पतालों के मरीज थे। जबकि वर्ष 2022 में अब तक 2,417 टीबी मरीजों को नोटिफ़ाई किया जा चुका है। निक्षय पोषण योजना के तहत वर्ष 2020 में 2.48 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2021 में 2.17 करोड़ रुपए क्षयरोग उपचाराधीनों के खाते में डीबीटी के तहत भेजे जा चुके हैं। जबकि वर्ष 2022 में अब तक 36.15 लाख रुपए डीबीटी के माध्यम से भेजे जा चुके हैं।

ऐसे लक्षण दिखें तो हो जाएँ सावधान

दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं । ऐसे लक्षणों वाले लोगों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स करने से टीबी से जल्द से जल्द मुक्ति मिल सकती है।

इस आर्टिकल के लेखक राघवेन्द्र मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं. वह विभिन्न समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं.

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