अयोध्या: 16 जनवरी से शुरू होने वाले रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का विधान अहम अनुष्ठान के साथ आज से प्रारंभ हो गया है. इसे देश के कोने-कोने से आए 121 वैदिक आचार्य संपन्न करा रहे हैं. इसमें मध्य प्रदेश , बिहार, महाराष्ट्र, वाराणसी, उड़ीसा और दिल्ली के आचार्य हैं. आपको बता दें कि इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान में नेपाल राष्ट्र के भी 12 आचार्य शामिल हैं. ये सभी रामजन्मभूमि परिसर की भूमि शांति के लिए यजुर्वेद का पारायण करेंगे, जो नियमित रूप से 14 जनवरी मकरसंक्रांति तक चलेगा. अनुष्ठान की पूर्णाहुति यज्ञ से होगी. इसके तुरंत बाद ही प्राण प्रतिष्ठा का मूल स्वरूप सामने होगा.
16 से 21 जनवरी तक पूजन की प्रक्रियाएं होंगी संपन्न ..
चार दिन चलेगा पथ कार्यक्रम-
यजुर्वेद का पाठ अगले चार दिनों तक चलेगा. पाठ के लिए 121 वेद पाठी बुलाए गए हैं, जो लगातार यजुर्वेद के ऋचाओं का पाठ करेंगे. इसके लिए पहले से ही सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं. यजुर्वेद को लेकर मान्यता है कि इसके पाठन से किसी स्थान पर पहले से मौजूद नकारात्मक ऊर्जाएं खत्म हो जाती हैं. मंदिर में नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करने के लिए ही यजुर्वेद का पाठ कराया जा रहा है.
प्राण प्रतिष्ठा..
अयोध्या में 22 जनवरी को नए मंदिर में भगवान राम के बाल रूप यानी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी. इसके लिए वैदिक अनुष्ठान मुख्य समारोह से एक सप्ताह पहले 16 जनवरी को शुरू हो जाएंगे. 16 जनवरी के दिन मंदिर ट्रस्ट की तरफ से नियुक्त यजमान प्रायश्चित समारोह का आयोजन करेंगे. इसके अलावा सरयू नदी के तट पर ‘दशविध’ स्नान होगा जिसमें विष्णु पूजा और गोदान जैसे अनुष्ठान भी शामिल होंगे.
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प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त-
22 जनवरी को भगवान राम नए राम मंदिर में विराजमान होंगे. काशी के वैदिक विद्वान प्राण-प्रतिष्ठा समारोह करेंगे. सुबह रामलला के विग्रह की पूजा की जाएगी और दोपहर 12:15 बजे से 12:45 बजे के बीच भगवान राम को मंदिर में विराजमान किया जाएगा. पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों श्रीराम लला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होगी. वह रामलला रामनगरी की पंचकोसी परिक्रमा कर अयोध्या के मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे.