London Diary: पत्रकारों को समर्पित है ये भगवान् का घर …….

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जब से इंसान इस पृथ्वी पर है तब से वह हमेशा किसी-न-किसी को अपना भगवान मानके पूजता रहा है. अगर पुरानी सभ्यताओं की बात की जाए तो सबसे पहले सूरज, अग्नि, पानी, और वायु को देवता मान के पूजा की जाती था. जैसे-जैसे मानव ने विकास किया वैसे-वैसे भगवान का चित्र और साफ़ होता गया, भगवान को नाम दिए गए, कही उनकी मुर्तिया बनाई गयीं, तो कहीं उनके निशानों को पूजा गया. पहले भाषा के हिसाब से फिर कबीले की हिसाब से धीरे धीरे धर्मों को बनाया गया. मानव ने धर्म बनाया और अलग अलग भाषा, स्थान, प्रान्त और विशवास के आधार पर भगवानो को अलग किया और आज इतिहास सबके सामने है पूरी दुनिया में मुख्य रूप से इसाई, इस्लाम, यहूदी, हिन्दू और बौद्ध धर्मो को माना जाता है.

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Gaurav Dwivedi

 

अब ये बात तो ज़ाहिर है कि जहाँ भगवान रहेंगे वहां उनके मंदिर, मस्जिद, चर्च होंगे. ये क्यों इतने बड़े बनाये गए, इसमें क्यों इतना पैसा खर्वः किया गया आज मुद्दा वो नहीं है, आज हम एक ऐसे चर्च की बात करेंगे जिसे पत्रकारों को समर्पित कर दिया गया है. लंदन के मुख्य चर्च सेंट पॉल्स चर्च के एकदम सामने लंदन की मशहूर फ्लीट स्ट्रीट है , इसी रोड पे जैसे जैसे आप आगे बढ़ेंगे आपको रॉयल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के वो दफ्तार मिलेंगे जो की कई सौ साल पुराने हैं पर आज भी उनको दफ्तर की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इतिहास के इस अजूबे को आज भी हर एक इंच से संभल के रखा गया है. रस्ते पे जैसे आप आगे बढ़ेंगे आप ट्रफ़ैलगर स्क्वायर पहुंच जायेंगे. खैर हमे उतना आगे नहीं जाना है थोड़ा पीछे चलते हैं और फ्लीट स्ट्रीट की एक छोटी सी गली में सेंट ब्राइड्स चर्च है, जो की करीब 1500 साल पुराना है वहां जाने का मौका मिला.

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सेंट ब्राइड चर्च की ख़ास बात ये है की इस चर्च को दुनिया भर में काम कर रहे पत्रकारों को समर्पित कर दिया गया है, दुनिया भर के पत्रकार जिन्होंने काम करते वक़्त अपनी जान गवा दी है या फिर लापता हैं उनके लिए प्रतिदिन प्रार्थना की जाती है. पूरे चर्च में ऐसे पत्रकारों की तस्वीर लगाई गयी है और हर बेंच किसी न किसी पत्रकार को समर्पित किया गया है. जाने पर ये सब तो बहुत अच्छा लगा, पर मन में एक सवाल था की जब समर्पित ही करना था तो फ्लीट स्ट्रीट का सेंट ब्राइड चर्च ही क्यों?

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फ्लीट स्ट्रीट की कहानी

फ्लीट स्ट्रीट जो की लंदन के सबसे बड़े चर्च सेंट पॉल्स के एकदम सामने है. एक समय था जब दुनिया भर की मीडिया एजेंसी और अखबार के दफ्तरों का हब हुआ करती थी. यही से पूरे ब्रिटेन के अखबार छपते थे और कई देशो में भेजे जाते थे. ये बात अलग है कि प्रिंटिंग प्रेस का अविष्कार इंग्लैंड में नहीं हुआ था पर समंदर पार से इन मशीनों को लाया जाता था और यहाँ पर छपाई की जाती थी. ब्रिटेन और उसके सारे शाषित राज्यों में भी अखबार यही से छप कर कई सालों तक गए हैं. आज भी अपनी ऐतिहासिक महत्तव को बचाने के लिए कई बड़े मीडिया संस्थान अपना ऑफिस फ्लीट स्ट्रीट में रखे हैं.

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दो बार ढह चूका है ये 1500 साल पुराना जर्नलिस्ट चर्च

यु तो ये चर्च करीब 1500 साल पुराना है पर अभी तक दो बार गहरे हादसे सह चूका है. सं 1666 में पहली बार इस चर्च को ग्रेट लंदन फायर ने जला दिया था. ग्रेट फायर ऑफ़ लंदन ने करीब पूरे लंदन को आपने काबू में ले लिया था , उस समय लोगों का मानना था की चाहे पूरा लंदन ही क्यों न भसम हो जाए पर सेंट पॉल्स चर्च को कुछ नहीं होगा पर सेंट पॉल्स चर्च भी पूरा जल गया था. ग्रेट फायर की बड़ी बात ये थी कि उस आग ने पूरे लंदन को जला कर राख कर दिया पर एक इंसान की भी मौत नहीं हुई थी. सेंट पॉल्स का जलना मानव जाती के लिए एक बड़ी सीख थी की कुदरत से बड़ा कोई भगवान नहीं होता.

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दूसरी बार सं 1940 में इस चर्च के ऊपर द्वित्य विश्व युद्ध में हिटलर की वायु सेना ने बम गिराए थे , उस वक़्त इस ईमारत के बाहरी ढांचे को तो कुछ नहीं हुआ था पर उसका इंटीरियर बिलकुल तबाह हो गया था, जिसको फिर से निर्माण कर के सं 1957 में खोला गया. आज इस चर्च के दो हिस्से हैं , एक ज़मीन से ऊपर और दूसरा ज़मीन के निचे, ऊपर का हिस्सा नया बना है जिसको इस तरह से बनाया गया है की वो मध्यकालीन समय का दिखे और ज़मीन के निचे इस ईमारत का पूरा इतिहास. एक छोटा सा म्यूजियम जहा पर 1500 साल के इतिहास की झलक है.

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