जावेद अख्तर को शिवसेना का जवाब, तालिबानी शासन मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि आरएसएस की तुलना तालिबान से करना उचित नहीं है। बहुसंख्यक हिंदुओं को लगातार दबाया न जाए।

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मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने हाल में एक टीवी न्यूज़ चैनल से बातचीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना तालिबान से की थी। जावेद अख्तर चारों राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की तुलना तालिबान से करने पर तरफ से घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी तो अख्तर पर हमलावर है ही अब शिवसेना ने भी अपने मुखपत्र सामना के जरिये जावेद अख्तर को जवाब दिया है।

हिन्दुओं को दबाया ना जाए:

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि आरएसएस की तुलना तालिबान से करना उचित नहीं है। यदि संघ तालिबानी विचारोंवाला होता तो भारत में तीन तलाक कानून नहीं बनता और लाखों मुस्लिम महिलाओं को आजादी की किरण नहीं दिखती। हिंदू राष्ट्र की वकालत करते हुए सामना में कहा गया है कि बाहरी हमलावरों ने हिंदू संस्कृति पर तलवार के दम पर हमला किया। अंग्रेजों के शासन में धर्म परिवर्तन हुए। सभी के खिलाफ हिंदू समाज लड़ता रहा लेकिन वह कभी भी तालिबानी नहीं बना। दुनिया के प्रत्येक राष्ट्र आज धर्म की बुनियाद पर खड़े हैं। चीन, श्रीलंका जैसे राष्ट्रों का अधिकृत धर्म बौद्ध, अमेरिका-यूरोपीय देश ईसाई तो शेष सभी राष्ट्र ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ के रूप में अपने धर्म की शेखी बघारते हैं। लेकिन विश्व पटल पर एक भी हिंदू राष्ट्र है क्या? बहुसंख्यक हिंदुओं को लगातार दबाया न जाए, यही उनकी एक वाजिब अपेक्षा है।

तालिबान मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा:

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि तालिबानी शासन मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। पाकिस्तान और चीन जैसे राष्ट्रों ने तालिबानी शासन का समर्थन प्रदान किया है क्योंकि इन देशों में मानवाधिकार, लोकतंत्र, व्यक्तिगत स्वतंत्रता का कोई मोल नहीं बचा है। हिंदुस्तान की मानसिकता वैसी नहीं है। हम हर तरह से सहिष्णु हैं।

बीजेपी ने पूछा- कार्रवाई कब करोगे?

सामना में लिखे इस लेख के बाद सियासत भी काफी तेज हो गयी है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक राम कदम ने ट्वीट करके शिवसेना से पूछा है कि कार्रवाई कब होगी।

 

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