‘महाराजा’ की घर वापसी, जानें टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया बनने की कहानी

सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया 68 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर टाटा ग्रुप के हाथों में आ गई है।

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सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया 68 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर टाटा ग्रुप के हाथों में आ गई है। टाटा संस ने कर्ज में डूबी एयर इंडिया के अधिग्रहण की बोली जीतकर इसे फिर अपने नियंत्रण में ले लिया है। शुक्रवार को सौदे की घोषणा के बाद रतन टाटा ने कहा कि टाटा समूह का एयर इंडिया के लिए बोली जीतना बड़ी खबर है। टाटा की भागीदारी वाली एयर इंडिया का 1953 में राष्ट्रीयकरण हुआ था। इस तरह सफलतापूर्वक प्राइवेट एयरलाइंस के तौर पर काम कर रही टाटा एयरलाइंस सरकारी कंपनी बन गई थी।

चिट्ठियां ढोने का काम करती थी टाटा एयरलाइंस:

जेआरडी टाटा ने अप्रैल 1932 में टाटा एयरलाइंस की नींव रखी। वह कंपनी की फ्लाइट खुद कराची से बंबई लेकर पहुंचे थे। यह क्षण ऐतिहासिक था क्योंकि यहीं से भारत में नागरिक उड्डयन की शुरुआत हुई। जेआरडी टाटा की पहली उड़ान में सवारियों की जगह 25 किलो चिट्ठियां थीं, जो लंदन से ‘इम्पीरियल एयरवेज’ द्वारा कराची लायी गयी थी। उस दौरान भारत में तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने टाटा एयरलाइंस को कोई आर्थिक मदद नहीं की। हालांकि, हर चिट्ठी पर किराये के तौर पर चार आने दिया करती थी।

टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया बनने की कहानी:

  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 29 जुलाई, 1946 को टाटा एयरलाइंस को पब्लिक कर दिया गया। इस वजह से आम नागरिक भी कंपनी में हिस्सेदारी ख़रीद सकते थे। कंपनी पब्लिक लिमिटेड हुई तो नाम भी बदल कर एयर इंडिया रख दिया गया।
  • आज़ादी के बाद यानी साल 1947 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत शेयर खरीद लिए।
  • भारत सरकार ने 1953 में एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास किया, जिससे एयर इंडिया समेत सात और प्राइवेट एयरलाइंस सरकारी क्षेत्र की कंपनियां बन गईं। हालांकि, जेआरडी ने इसके खिलाफ जोरदार लड़ाई लड़ी थी।

एयर इंडिया के राष्ट्रीयकरण को लेकर नेहरू से नाराज थे जेआरडी टाटा:

‘द टाटा ग्रुप: फ्रॉम टॉर्च बियरर्स टू ट्रेलब्लेजर्स’ किताब लिखने वाले शशांक शाह ने एयर इंडिया के राष्ट्रीयकरण को लेकर जेआरडी टाटा और पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच टकराव का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि जब उड्डयन क्षेत्र की कंपनियों के राष्ट्रीयकरण पर बात भारत सरकार की तरफ से हुई तो जेआरडी ने इस पर नेहरू के सामने ही नाराजगी जताया था। उन्होंने कहा था कि सरकार नागरिक उड्डयन क्षेत्र में निजी कंपनियों को दबाना चाहती है, खासतौर पर टाटा की हवाई सेवाओं को। हालांकि, नेहरू ने जेआरडी टाटा को चिट्ठी लिखकर समझाने की कोशिश की और ऐसा किसी भी प्रकार का इरादा न रखने को कहा था।

दो जहाज से शुरू हुई थी कंपनी:

जेआरडी टाटा ने 1932 में मुंबई से टाटा एयरलाइंस की शुरुआत की थी। जब भी बरसात होती या मानसून आता, तो मैदान में पानी भर जाता था। उस समय कंपनी के पास छोटे सिंगल इंजन वाले सिर्फ दो जहाज, दो पायलट, तीन मैकेनिक, चार कुली और दो चौकीदार हुआ करते थे।

नहीं भुलाया जा सकता है योगदान:

एयरलिफ्ट फिल्म देखी है आपने…असल जिंदगी में फिल्म से भी ज्यादा रोमांचक वाकया 1990 के खाड़ी युद्ध का था। जब एयर इंडिया ने खाड़ी के देशों में फंसे करीब पौने दो लाख भारतीयों को सुरक्षित निकाला था। एयर इंडिया ने अपने सारे विमान इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए लगा दिए थे और एयर इंडिया की मदद से चलाया गए इस अभियान को दुनिया का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन माना जाता है।

 

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