महिला कॉन्स्टेबल अब कहलाएगी पुरुष कॉन्स्टेबल, राज्य के गृह विभाग ने दी इजाजत

एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को मध्यप्रदेश सरकार ने जेंडर चेंज कराने की अनुमति प्रदान कर दी है। बुधवार को राज्य के गृह विभाग ने इसके लिए परमिशन लेटर जारी किया।

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एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को मध्यप्रदेश सरकार ने जेंडर चेंज कराने की अनुमति प्रदान कर दी है। बुधवार को राज्य के गृह विभाग ने इसके लिए परमिशन लेटर जारी किया। महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जेंडर चेंज कराने की प्रोसेस पूरी होने के बाद पुरुष कॉन्स्टेबल के रूप में पहचान होगी। अपर मुख्य सचिव गृह विभाग डॉ। राजेश राजौरा ने बताया कि किसी कर्मचारी को जेंडर बदलने की इजाजत मध्यप्रदेश सरकार ने पहली बार प्रदान की है।

कॉन्स्टेबल को जेंडर आइडेंटिटी डिसआर्डर’ की समस्या:

अपर मुख्य सचिव गृह विभाग डॉ। राजेश राजौरा के मुताबिक मध्यप्रदेश के एक जिले में पदस्थ महिला कॉन्स्टेबल को बचपन से ही ‘जेंडर आइडेंटिटी डिसआर्डर’ की समस्या थी और इसकी पुष्टि राष्ट्रीय स्तर के मनोचिकित्सकों की ओर से भी की गई थी। इस बीमारी के वजह से महिला कॉन्स्टेबल को शरीर और लैंगिक स्वभाव मिसमैच लगता था। कॉन्स्टेबल ने पुलिस मुख्यालय को जेंडर परिवर्तन के लिए आवेदन दिया था। पुलिस मुख्यालय ने होम डिपार्टमेंट से इसके लिए अनुमति मांगी थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिला कॉन्स्टेबल को जेंडर चेंज कराने की अनुमति प्रदान कर दी गई है।

क्या होता है आइडेंटिटी डिसऑर्डर ?

जेंडर डिस्फोरिया या आइडेंटिटी डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें जन्म के समय दिए गए जेंडर के कारण एक व्यक्ति को अत्यधिक परेशानी होती है। इस बीमारी के वजह से एक लड़का, लड़की की तरह और एक लड़की, लड़के की तरह व्यवहार करती है। दोनों ही विपरीत व्यवहार में खुद को ज्यादा सहज महसूस करते हैं।

 

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