हिंदुस्तान के सबसे शातिर चोर की कहानी, बन बैठा जज और दे दी सैकड़ों कैदियों को जमानत

आज हम ऐसे चोर के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसी के भी होश उड़ा देगा। भारत में एक ऐसा शातिर चोर था जिसने दो महीने तक जज की कुर्सी पर बैठकर कई फैसले सुनाए।

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बेशक दुनिया में अच्छे लोंगो की कमी नहीं है लेकिन एक से बढ़कर एक शातिर भी मौजूद है। आए दिन कहीं न कहीं चोरी की घटनाएं सामने आती ही रहती हैं। कुछ चोर के किस्से पढ़कर तो लोग भी कई बार हैरत में पड़ जाते हैं। लेकिन आज हम ऐसे चोर के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसी के भी होश उड़ा देगा। भारत में एक ऐसा शातिर चोर था जिसने दो महीने तक जज की कुर्सी पर बैठकर कई फैसले सुनाए। चलिए आपको इस शातिर चोर की बातें बताते हैं।

नाम धनी राम मित्तल…

धनी राम (1)

नटवर लाल और भारतीय चार्ल्स शोभराज के नाम से कुख्यात धनीराम मित्तल ने 25 साल की उम्र से ही चोरी को अपना पेशा बना लिया था। साल 1964 में उसे पहली बार चोरी के इलज़ाम में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कहा जाता है की वो इकलौता ऐसा ठग है जिसे चोरी के इल्जाम में सबसे ज्यादा बार गिरफ्तार किया जा चुका है। सबसे खास बात ये है कि ये चोर दिन के उजाले में भी चोरी की वारदात को अंजाम देता था। अब तक लगभग 1 हजार के उपर गाड़ियां चुरा चुका है।

कहां से हुई शुरूआत:

1939 में हरियाणा में पैदा हुआ धनीराम के बारे में कहा जाता है कि वो पढ़ने में काफी तेज था, लेकिन उसने पढ़ाई से ज्यादा अपना दिमाग जयराम पेशे की दुनिया में लगा दिया। रोहतक के एक कॉलेज से स्नातक होने के बाद नकली कागजों के दम पर 1968-74 तक बतौर स्टेशन मास्टर काम किया। बाद में पोल खुली तो फरार हो गया। तब तक वो जूर्म की दुनिया में कदम रख चुका था और गाड़ियों की चोरी करने लगा था।

कानून की पढ़ाई:

कहा जाता है कि धनीराम ने कानून की पढ़ाई भी की थी। इसके अलावा उसने हैंड राइटिंग विशेषज्ञ और ग्राफोलाजी की डिग्री भी हासिल की थी। कानून की पढ़ाई के बाद वो अपना केस तो खुद देखता ही था साथ ही चोरों को कानून से बचने के टिप्स भी देता था। इसी पढ़ाई और हैंड राइटिंग एक्सपर्ट के सहारे उसने कई फर्जीवाड़े को अंजाम भी दिया।

जब जज ने निकाला:

एक और कहानी धनीराम के बारे में बहुत चर्चित है। एक बार जब उसे पेशी के जज साहब ने उसे कोर्ट से ही बाहर निकाल दिया, दरअसल जज साहब कई बार धनीराम को अलग-अलग मामलों में पेशी के दौरान देख चुके थे, जब एक बार फिर जज साहब ने धनीराम को देखा तो गुस्से में कोर्ट से बाहर जाने के लिए बोल दिया। धनी राम ने अपने शातिर दिमाग का प्रयोग किया और वहां से नौ दो ग्यारह हो गया। पेशी के लिए जब धनीराम का नाम पुकारा गया तो पुलिस के हाथ-पांव फूल गये क्योंकि तब तक वो फरार हो चुका था।

जब बन गया जज:

धनी राम ने फर्जी कागजात बनाकर हरियाणा के एक कोर्ट के एडिशनल सेशन जज को एक फर्जी लैटर बनाकर छुट्टी पर भेज दिया। फिर उसी जज की कुर्सी में खुद बैठ गया और फैसला सुनाने लगा।  फिर दो महीने तक उस जज की कुर्सी पर बैठकर अदालत का कामकाज निपटाता रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दो महीने के दौरान धनीराम ने 2740 लोगों को जमानत दे दी थी। मामला का खुलासा होने से पहले धनी राम फरार हो चुका था। उसके सुनाए फैसले के बाद रिहा किए गए कैदियों को फिर जेल की हवा खानी पड़ी।

 

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