उदयपुर हत्याकांड: भारत समेत 100 से ज्यादा देशों में सक्रिय है दावत-ए-इस्लामी, 32 ऑनलाइन कोर्स, जिहाद की स्पेशल ट्रेनिंग और जानिए बहुत कुछ

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राजस्थान के उदयपुर में हुए जघन्य हत्याकांड का कनेक्शन पाकिस्तान के साथ मिला है. इसके साथ मृतक दर्जी कन्हैया लाल का गला रेतने वाले दोनों आरोपी पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी (Dawat-e-Islami) से जुड़े थे. दुनियाभर के 100 से ज्यादा देशों में दावत-ए-इस्लामी संगठन सक्रिय है. इतना ही नहीं, इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए 32 तरीके के ऑनलाइन कोर्स भी चला रहा है. बता दें भारत में दावत-ए-इस्लामी संगठन पर धर्मांतरण के भी आरोप लग चुके हैं. बताया जा रहा है कि दावत-ए-इस्लामी संगठन द्वारा जगह-जगह पर दान पेटियां रखी जाती हैं. जिसके माध्यम से आने वाले धन को गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है.

Dawat-e-Islami CANADA | Introduction

यहां जानिए दावत-ए-इस्लामी के बारे में

1- दावत-ए-इस्लामी की स्थापना साल 1981 में पाकिस्तान के कराची में हुई थी. मौलाना अबू बिलाल मुहम्मद इलियास ने इसकी स्थापना की थी. भारत में यह संगठन पिछले चार दशकों से सक्रिय है. शरिया कानून का प्रचार-प्रसार करना और उसकी शिक्षा को लागू करना संगठन का उद्देश्य है. इस समय यह संगठन करीब 100 से ज्यादा देशों में अपना नेटवर्क फैला चुका है. यह संगठन खुद को गैर राजनीतिक इस्लामी संगठन करार देता है.

2- इसके अलावा दावत-ए-इस्लामी की अपनी खुद की वेबसाइट है. वेबसाइट के माध्यम से यह इस्लामिक संगठन कट्टर मुसलमान बनने के लिए शरिया कानून के तहत इस्लामी शिक्षाओं का ऑनलाइन प्रचार-प्रसार कर रहा है. करीब 32 तरह के इस्लामी कोर्स इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. महिलाओं व पुरुषों दोनों के लिए अलग-अलग तरह के कोर्स हैं. इसके अलावा यह संगठन कुरान पढ़ने और मुसलमानों को हर तरीके से शरिया कानून के लिए तैयार करता है.

Madani Courses ! Dawat-e-islami

3- दावत-ए-इस्लामी संगठन अपनी वेबसाइट पर एक न्यू मुस्लिम कोर्स भी संचालित करता है. यह कोर्स भी पूरी तरह से ऑनलाइन है. इसका उद्देश्य धर्मांतरण कर नए-नए मुसलमानों को इस्लामी शिक्षाओं से रूबरू कराना है. इस कोर्स के माध्यम से धर्मांतरण करने वालों को जिहादी बनने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है.

4- भारत में दावत-ए-इस्लामी संगठन की शुरुआत साल 1989 से हुई थी. तब पाकिस्तान से उलेमा का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. इसके बाद यह संगठन धीरे-धीरे भारत में अपनी जड़ें मजबूत करता चला गया. यहां मुंबई और दिल्ली में इस संगठन के हेडक्वार्टर हैं. इसके ज्यादातर सदस्य हरे रंग की पगड़ी बांधते हैं. अपने संदेश को प्रसारित करने के लिए इस संगठन ने मदनी चैनल भी बनाया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या करने वाले दोनों आरोपी मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ‘दावत-ए-इस्लामी’ नाम के संगठन से जुड़े हुए हैं. ये दोनों इस्लामी संस्था के ऑनलाइन कोर्स से जुड़े हुए हैं. हत्या के बाद दोनों आरोपी अजमेर दरगाह जियारत के लिए जाने वाले थे. दरअसल, यह संगठन दुनिया भर में सुन्नी कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है.

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