हिन्दी पत्रकारिता का उदय

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हिन्दी पत्रकारिता के चर्चा के बिना भारतीय समाचार-पत्रों के विकास का ब्योरा अधूरा होगा। हिन्दी समाचार-पत्रों का जनमत बनाने एवं पत्रकारिता के दायित्व निर्वाह में उल्लेखनीय योगदान रहा। राष्ट्रीय आंदोलन के समय हिन्दी के पत्रों का दृष्टिकोण देश भक्ति की भावना से ओत-प्रोत रहा। उस समय की साहसिक पत्रकारिता के अनेक उदाहरण उपलब्ध है।

हिन्दी अखबारों की शुरुआत

30 मई 1826 को पं0 युगल किशोर शुक्ल ने देवनागरी में हिन्दी का पहला समाचार पत्र ‘उदंत मार्तन्ड’ शुरू किया। ‘बंगदूत’ ठीक उसके बाद 10 मई 1829 को प्रकाशित हुआ। 1854 को कलकत्ता से एक दैनिक प्रकाशित हआ जिसका नाम था ‘समाचार सुधा दर्पण’। 1868 तक अनेक हिन्दी पत्र प्रकाशित होने लगे।

‘बनारस अखबार’, ‘मार्तण्ड’, ‘ज्ञानदीप’, ‘मालवा अखबार’, ‘जगद्दीपक भास्कर’, ‘साम्यदंड सुधाकर’, ‘बुद्धिप्रकाश’, ‘प्रजाहितैषी’ और ‘कविवचन सुधा’ आदि। ‘कविवचन सुधा’ का संपादन भारतेन्दु हरिशचन्द्र किया करते थे। सरस्वती को वर्तमान शताब्दी की अत्यधिक महत्वपूर्ण पत्रिका के रूप में माना जाता है जो 1900 में शुरू हुई।

20वीं शताब्दी के अखबार

19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में हिन्दी के अनेक दैनिक समाचार पत्र निकले जिनमें ‘हिन्दुस्तान’ ‘भारतोदय’,‘भारतमित्र’, ‘भारत जीवन’, ‘अभ्युदय’ ‘विश्वमित्र’ ‘आज’, ‘प्रताप’ ‘विजय’ ‘अर्जुन’ आदि प्रमुख हैं। 20वीं शताब्दी के चौथे-पांचवे दशकों में हिन्दुस्तान ‘आर्यावर्त’ ‘नवभारत टाइम्स’, ‘नई दुनिया’, ‘जागरण’, ‘अमर उजाला’, ‘पंजाब केसरी’, ‘नव भारत’ आदि प्रमुख हिन्दी दैनिक सामने आये।

पाठकों की संख्या में इजाफा

आजादी के बाद हिन्दी में दैनिकों, साप्ताहिकों और मासिकों की संख्या में आशातीत वृद्धि हुई। एक दो अपवादों को छोड़कर हर हिन्दी प्रांत से हिन्दी के सशक्त दैनिक प्रकाशित होने लगे। हिन्दी के पाठकों की संख्या में इतनी वृद्धि हुई है कि दिल्ली, इंदौर, लखनऊ, बनारस, पटना, जयपुर आदि शहरों से कई-कई दैनिक एक साथ निकल रहे हैं। इसी प्रकार ज्ञान-विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में हिन्दी पत्रकारिता प्रभावशाली ढंग से प्रवेश कर चुकी है।

हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य

कुछ वर्षों पूर्व में भारत वर्ष में प्रकाशित होने वाले कुल समाचार पत्रों की संख्या 11926 थी। इनमें से सबसे अधिक हिन्दी में पत्र छपते थे। इसके पश्चात तमिल भाषी दैनिक पत्रों का नंबर आता है। साक्षरता के अभिवृद्धि के साथ समाचार-पत्रों के पाठकों की संख्या में भी बढोत्तरी हुई है। हिन्दी क्षेत्रों में साक्षरता का विकास जितनी तेजी से होगा। हिन्दी पत्रकारिता भी उतनी ही गति से आगे बढ़ेगी। उसकी कला और शिल्प में भी निखार आया। यह कहना गलत न होगा कि हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य अत्यंत उज्जवल है।

 

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