भविष्य को प्रकाशमान बनाने की चाह में रोड पर डटे हैं दृष्टिबाधित

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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी मिमिकरी से मुराद बनाने वाले दृष्टिबाधित अभय कुमार रोड पर है। एक विद्यालय में टीचर की भूमिका निभाने वाला उनका सीनियर भी वहीं है। सिर्फ ये दोनों ही नहीं अंधेरी दुनिया में जीने को मजबूर है बल्कि दर्जनों ब्लाइंड स्टूडेंट्स अपने भविष्य को अंधकार से बचाने के लिए दो हफ्तों से अधिक समय से दिन-रात सड़क पर गुजार रहे हैं।

कड़कती धूप हो या तेज बरसात, मौसम की बेरहमी से बचने के लिए सिर के ऊपर एक पॉलिथिन और बिछौने के नाम पर दरी है। ये स्टूडेंट्स वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय के छात्र हैं। एक ट्रस्ट के द्वारा संचालित होने वाला उनका विद्यालय बंद होने के कगार है। इसे बचाने के लिए स्टूडेंट्स अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। उनकी बात सुनने के लिए अब तक कोई नहीं आया है।

सड़क पर खाना, सड़क पर सोना-

अपनी मांगों के समर्थन में अंधविद्यालय के 60 से ज्यादा स्टूडेंट्स अपने विद्यालय के सामने दुर्गाकुंड-लंका मेनरोड पर पिछले 18 दिन से लगातार धरना दे रहे हैं। रोड पर दोनों ओर बैरिकेडिंग लगा दिया है। इस रास्ते से किसी को आने-जाने नहीं दे रहे हैं।

धरना कर रहे छात्रों का कहना है कि विद्यालय का गेट बंद कर दिया गया है। मजबूरी में उन्हें दिन-रात सड़क पर गुजारना पड़ रहा है। उनके आंदोलन को समर्थन करने वाले लोगों और विद्यालय के कुछ पूर्व छात्र उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। मौसम की बेरहमी से बचने के लिए बिस्तर और पॉलिथिन आदि का इंतजाम किया है।

उनकी मदद से ही दो वक्त की रोटी मिल पा रही है। कुछ लोगों का विरोध भी सहना पड़ रहा है। कुछ दिनों पहले एक बाइक सवार ने जबरन जाने के चक्कर में एक छात्र पर बैरिकेडिंग गिरा दिया था जिससे उनकी टांग टूट गयी थी।

गा-बजा के कह रहे अपनी बात-

धरनारत स्टूडेंट्स की आंखों में रोशनी नहीं लेकिन ऊपर वाले ने इतना हुनर दिया कि किसी को भी अपना मुरीद बना लें। गीत-संगीत से उनका गहरा जुड़ाव है। अपने आंदोलन में भी इसे शामिल कर लिया है।

कोई ढपली बजाता है तो कोई हरमोनियम, नाल और करताल की निकलने वाली ध्वनि के जरिए अपनी मांगे उठाते हैं। इन ब्लाइंड स्टूडेंट्स का दर्द है कि उनकी बात कोई सुन नहीं रहा है। वो कहते हैं कि उन्होंने हर जिम्मेदार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की लेकिन किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया है।

कई बार संसदीय कार्यालय पर ज्ञापन दे चुके हैं। स्थानीय प्रशासन के पास भी हर संभव तरीके से अपनी बात पहुंचा रहे हैं पर नतीजा सिफर है। उनसे आंदोलन को समर्थन देने वालों के सहयोग से यह अनवरत जारी है।

दृष्टिबाधित छात्रों की शिक्षा का प्रमुख केंद्र-

बनारस के दुर्गाकुंड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय का निर्माण सन 1972 में हुआ था। 1984 व 1992 में इसे क्रमशः दसवीं और बारहवीं की सरकारी मान्यता प्राप्त हुई। यहां 250 दृष्टिहीन छात्रों के पठन-पाठन की आवासीय व्यवस्था है।

यहां केवल यूपी नहीं बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, असम आदि प्रदेशों से भी छात्र पढ़ाई करने आते थे। आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि विद्यालय का संचालन करने वाले श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार सेवा समिति ट्रस्ट का फैसला है कि नवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई बंद कर दी जाए। इसके लिए आर्थिक समस्या को वजह बता रहे हैं।

अभी सिर्फ क्लास 6 तक के बच्चों का एडमिशन हो रहा वो भी गिनती के। छात्रों का कहना है कि विद्यालय का सालाना खर्च लगभग 70 लाख है। इसमें भी सरकार अनुदान देती है। साथ ही तमाम दानदाता हैं जो खर्च के लिए रुपये देते हैं। इसके बावजूद ट्रस्ट रुपयों की कमी का हवाला दे रहा है।

बहनों की कमी नहीं होने दिया महसूस-

varanasi blind school

रक्षाबंधन पर जब हर भाई की आस रही कि उनकी बहन उसके कलाई पर राखी बांधे इस दिन भी दृष्टिबाधित छात्र अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए रोड पर डटे रहे। तमाम संवेदनशील युवतियां इनके पास आईं और इन्हें राखी बांधकर एहसास कराया कि वो अकेले नहीं हैं।

आंदोलन करने वाले छात्रों की मांग है कि इस अंधविद्यालय को सरकार पूर्णतया अपने अधिकार क्षेत्र में ले। विद्यालय से निकाले गए छात्रों को वापस दाखिला दिया जाए। तत्काल प्रभाव से विद्यालय को पुनः संचालित किया जाए।

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