वााराणसी: पिछले एक पखवाड़े से चल रहे 117 वें करपात्र प्राकट्योत्सव के अन्तिम दिन बुधवार को भव्य गौरी केदारेश्वर जलाभिषेक यात्रा निकाली गई. दुर्गाकुण्ड स्थित धर्मसंघ (मणि मंदिर) के तत्वावधान में चल रहे पंद्रह दिवसीय महोत्सव के समापन पर बुधवार की सुबह धर्मसंघ परिसर में स्थित मणि मंदिर से धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के पावन सानिध्य में एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई. डमरूओं की गड़गड़ाहट से गुंजित शोभायात्रा गुरूधाम, चेतमणि चैराहा, विजया तिराहे, भेलूपुर, सोनारपुरा होते हुए केदार घाट पहुंची. रास्तेभर यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर लोग फूलों की वर्षा से उनका स्वागत कर रहे थे.
251 कलशों से जलाभिषेक…
251 कलशों से भक्तों ने गौरी केदारेश्वर का जलाभिषेक किया. धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के प्राकट्योत्सव के अवसर पर निकली शोभायात्रा में सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.
शोभायात्रा में सबसे आगे बटुक धर्मसंघ का बैनर लिए चल रहे थे, उनके पीछे पीले रंग के स्वास्तिक युक्त धर्मध्वजा लिए बटुक चल रहे थे, उनके साथ दंडी सन्यासियों का समूह चल रहा था. उसके पीछे फुलों से सुसज्जित गाड़ी पर करपात्री जी महाराज का भव्य चित्र रखा गया था. इस अवसर पर डमरू वादकों का भी एक दल यात्रा में शामिल रहा. 21 डमरू वादकों का दल एक साथ डमरू बजाते हुए चल रहा था, जिससे समूचा माहौल शिवमय नजर आया. उनके पीछे बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरूष भक्त माथे पर कलश लिए चल रहे थे. सबसे पीछे धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज भव्य रथ पर विराजमान होकर चल रहे थे.
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शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु हर – हर महादेव शंभु, काशी विश्वनाथ गंगे, उॅं नमः शिवाय आदि मंत्रोच्चार करते हुए चल रहे थे. साथ ही साथ धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो का उद्घोष करते हुए केदार घाट पहुॅचें. वहाँ पण्डित जगजीतन पाण्डेय के आचार्यत्व में 11 वैदिक आचार्यो ने गौरी केदारेश्वर का सर्वप्रथम षोडशोपचार विधि से पूजन किया, तत्पश्चात सबसे पहले शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी ने 21 लीटर दूध एवं गंगा जल से बाबा का अभिषेक किया. उसके बाद 251 कलशों के जल से केदार जी का जलाभिषेक किया गया.
इसके उपरान्त धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज एवं पण्डित जगजीतन पाण्डेय द्वारा श्रद्धालुओं के साथ केदार घाट स्थित करपात्र धाम में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के प्रतिमा सहित अन्य देव विग्रहों का विधिवत पूजन अर्चन किया गया.