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कैडबरी ने खोया 170 साल का शाही भरोसा, गुणवत्ता पर उठे सवाल

मशहूर ब्रिटिश चॉकलेट मैन्यूफ़ैक्टरिंग कंपनी कैडबरी को 170 साल बाद अपना रॉयल वारंट खोने का झटका लगा है. यह वारंट कंपनी को यह दावा करने की अनुमति देता था कि वह ब्रिटिश शाही परिवार को चॉकलेट और कोको प्रॉडक्ट्स सप्लाई करती है. कंपनी को यह विशेष मान्यता 1854 में महारानी विक्टोरिया से मिली थी, लेकिन हाल ही में यह वारंट किंग चार्ल्स III के नेतृत्व में कैडबरी से छीन लिया गया है, क्योंकि कंपनी आवश्यक मानकों को पूरा करने में असफल रही.
कैडबरी के अलावा 100 ब्रांड और कंपनियों को रॉयल वारंट होल्डर्स की लिस्ट से हटा दिया गया है और 12 महीनों के भीतर सभी कंपनियों को अपने पैकजिंग से ‘कोट ऑफ़ आर्म्स’ यानी शाही चिह्न को हटाना होगा.

कैसे हुई कैडबरी की शुरुआत

कैडबरी की शुरुआत 1824 में बर्मिंघम में जॉन कैडबरी ने एक छोटी सी किराने की दुकान से की थी, जहाँ कोको और पीने की चॉकलेट बेची जाती थी. उनकी मेहनत से यह ब्रांड विकसित हुआ और अंततः बॉर्नविले फैक्ट्री का निर्माण हुआ, जो दुनिया की सबसे बड़ी कोको फैक्ट्री बन गई.
हालांकि, 2010 में 18.9 बिलियन डॉलर में कैडबरी का अधिग्रहण अमेरिकी कंपनी क्राफ्ट फूड्स ने किया और 2012 में इसे मोंडेलेज इंटरनेशनल के डिवीजन में शामिल कर दिया गया.
कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि ओनरशिप में इस बदलाव से कैडबरी के उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित हुई.

क्या है रॉयल वारंट

• रॉयल वारंट, ब्रिटिश किंग या रॉयल फ़ैमिली के सदस्य द्वारा उन व्यक्तियों या कंपनियों को प्रदान किया जाता है, जो नियमित रूप से शाही परिवार को वस्तुएं या सेवाएं सप्लाई करते हैं.

• यह मान्यता का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि सप्लायर की गुणवत्ता और सेवा शाही मानकों के अनुरूप हैं.
• रॉयल वारंट केवल 5 साल के लिए वैलिड होता है और हर वारंट की समाप्ति के पहले उसकी समीक्षा की जाती है.
• यह कंपनियों को अपने उत्पादों और विज्ञापनों पर ‘कोट ऑफ़ आर्म्स’ यानी शाही प्रतीक चिन्ह का उपयोग करने की अनुमति देता है, जो उनकी ब्रांड बढ़ाने में मदद करता है.
• रॉयल वारंट केवल व्यापारियों को प्रदान किए जाते है. प्रोफेशनल सर्विसेज़ जैसे बैंकिंग, लीगल सर्विसेज़ या मीडिया इसके लिए पात्र नहीं होते.
• रॉयल वारंट होल्डर्स का एक संघ भी है, जिसे रॉयल वारंट होल्डर्स एसोसिएशन कहा जाता है, जो 1840 में स्थापित किया गया था.

ब्रिटेन में, वर्तमान में लगभग 750 व्यक्ति और कंपनियां शाही परिवार के 800 से अधिक रॉयल वारंट होल्डर्स हैं.
किंग चार्ल्स III की नई रॉयल वारंट सूची में उन 386 कंपनियों को शामिल किया गया है, जो पहले महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के तहत वारंट होल्डर्स थीं. इनमें जॉन लुईस, हेंज, नेस्ले, मोएत एंड शॉन-दो, वीटाबिक्स और प्रेस्टैट लिमिटेड जैसे ब्रांड शामिल हैं.

क्यों छिना गया रॉयल वारंट ?

हालांकि कैडबरी से रॉयल वारंट वापस लेने के संबंध में बकिंघम पैलेस ने विशिष्ट कारण नहीं बताए हैं, लेकिन कई कारकों का योगदान हो सकता है जैसे ;

हाल के वर्षों में, विशेषकर महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के बाद, रॉयल फ़ैमिली में कैडबरी की कम सप्लाई ने एक भूमिका निभाई होगी. रॉयल वारंट व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के बजाय पूरे शाही घराने में उपभोग के रुझान को दर्शाता है.
किंग चार्ल्स III, सस्टेंबिलिटी और हेल्थी ईटिंग के लिए प्रसिद्ध हैं. जैविक, पर्यावरण-अनुकूल और पोषक तत्वों से भरपूर उत्पादों के प्रति उनकी प्राथमिकता ने निर्णय को प्रभावित किया होगा.
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत में एक्टिविस्ट ग्रुप “बी 4 यूक्रेन” ने जून में किंग चार्ल्स को संबोधित एक ओपन लेटर लिखा, जिसमें उन कंपनियों से वारंट वापस लेने का आग्रह किया, जो यूक्रेन पर आक्रमण के बावजूद रूस में संचालन कर रही है. समूह ने कहा कि रुस में कम्पनियों की निरंतर उपस्थिति और वित्तीय सहायता यूक्रेन के ख़िलाफ़ जारी क्रूर युद्ध को और लंबा खींचने का काम कर सकता है. शायद इसी कारण यूनिलीवर जैसे ब्रांड को भी वारंट खोना पड़ा.

हालांकि कैडबरी को हटाना सीधे तौर पर इस अभियान से जुड़ा हुआ नहीं लगता है क्योंकि बकार्डी और सैमसंग जैसी अन्य टार्गेटेड कंपनियों ने अपने वारंट बरकरार रखे हैं.
द रॉयल फ़ैमिली की वेबसाइट के अनुसार यदि उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता अपर्याप्त है तो वारंट का नवीनीकरण नहीं किया जा सकता.

ब्रांडिंग और लागत पर असर

बर्मिंघम बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर डेविड बेली के मुताबिक, रॉयल वारंट ब्रांड के लिए “मंजूरी की मुहर” की तरह होता है, जो कंज्यूमर्स के विश्वास को मजबूत करता है. उन्होंने कहा वारंट खोने के कारण कंपनी की लागत प्रभावित होगी, क्योंकि ब्रांड को इसे सभी पैकेजिंग से हटाना होगा.
उन्होंने यह भी कहा, “रॉयल एन्डॉर्समेन्ट (शाही समर्थन) से न केवल ब्रिटिश कंपनियों को फायदा होता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है. रॉयल वारंट किसलिए है, अगर यह ब्रिटिश जॉब और ब्रिटिश प्रोडक्शन में मदद करने के लिए नहीं है.”

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कैडबरी की प्रतिक्रिया

कैडबरी के अमेरिकी ओनर मोंडेलेज इंटरनेशनल ने वारंट खोने पर निराशा जताते हुए कहा, “हमें पहले से ही मिले रॉयल वारंट पर गर्व है और हम इस फैसले का सम्मान करते हैं. हम अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारकर आवश्यक मानकों को फिर से हासिल करने की कोशिश करेंगे.”

कैडबरी की चुनौतियां

2024 में अपनी 200वीं वर्षगांठ मना रही कैडबरी के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है. शाही वारंट खोने के बावजूद, कंपनी दुनिया भर के कंज्यूमर्स के बीच एक लोकप्रिय चॉकलेट ब्रांड बनी हुई है. अब सवाल यह है कि क्या कैडबरी अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार कर रॉयल वारंट फिर से हासिल कर पाएगी या नहीं.

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