कर रहे थे सांस का धंधा, पुलिस ने कसी नकेल

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कोरोना संक्रमण अब ख़तरनाक रूप अख्तियार कर चुका है. श्मशान घाटों पर लाशों का ताँता लगा है तो कब्रगाहें भी मय्यत के बोझ से परेशान हैं. हर ओर अपनों के खोने का गम दिख रहा है. अस्पतालों का हाल तो और भी बुरा है. अगर बेड मिल भी गया तो ऑक्सीजन का जुगाड़ करना टेढी खीर की तरह है. ऑक्सीजन डीलरों ने आपदा की इस घड़ी को अवसर में बदल दिया है. ऐसे में ऑक्सीजन की ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर प्रशासन ने नकेल कसनी शुरु कर दी है.

घरों के बाहर पुलिस का पहरा

जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने वालों के घर के सामने पहरा बैठा दिया है. चौबीसों घण्टेँ पुलिस वाले ऑक्सीजन डीलरों के बाहर डटे हैं. दरअसल पिछले दिनों कमिश्नर और डीएम ने डीलरों से स्पष्ट कर दिया था कि सबसे पहले अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी. कोरोना वायरस के मामलों के बाद ऑक्सीजन की मांग अचानक बढ़ गई है. यह समस्या वाराणसी की ही नहीं है बल्कि तमाम शहरों में आई है. इसी का लाभ उठाते हुए कुछ लोग बेतहाशा चोरी से ऑक्सीजन बेचने में लगे हैं. अस्पतालों में सस्ते दर पर ऑक्सीजन मिल जाती है.

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मुँहमांगी रकम में बिक रहा है सिलेंडर

सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की खरीद मात्र 250 रूपये में होती है. लेकिन कालाबाजारी करने वालों ने कोरोना काल में अस्पतालों में सप्लाई बंद कर इसकी ब्लैक मार्केटिंग शुरु कर दी है. सूत्र बताते हैं कि कुछ लोग 250 रूपये वाली गैस 8000 रूपये में बेच रहे हैं. इसी तरह तीन हजार रूपये वाला सिलेंडर 30 हजार रूपये तक बेचा जा रहा है. हालांकि जिला प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कस दी है.

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