भारत में जल्द लॉन्च होगा 5G, जानिए 1G से 5G होने में हुए क्या बदलाव

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बीते 19 मई को संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आईआईटी मद्रास (IIT Madras) में देश में पहली 5G कॉल की थी. उन्होंने ऑडियो और वीडियो दोनों तरह की कॉल की थी. उससे पहले 17 मई को भारत का पहला 5G टेस्टबेड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने लॉन्च किया था. साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि इस दशक के अंत तक देश में 6G सेवाएं भी शुरू की जाएंगी. फ़िलहाल, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा में 5G की शुरुआत हो चुकी है. जल्द ही भारत में भी इसके शुरू होने की उम्मीद है. इस साल के अंत तक केंद्र सरकार 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी कर सकती है. नीलामी के बाद साल के अंतिम या फिर अगले साल के शुरु में 5G सेवाएं शुरू हो सकती हैं.

यहां देखे क्या हुए बदलाव…

साल 1970 में जापान में हुई 1G की शुरुआत हई थी, जिसे मोबाइल टेलीकम्युनेशन टेक्नोलॉजी कहा जाता था. 1G में केवल वॉयस कॉल हो सकती थी, जिसमें स्पष्ट आवाज नहीं आती थी. साथ ही कवरेज कम था और रोमिंग की कोई व्यवस्था नहीं थी. ये टेक्नोलॉजी दो दशक तक ही इस्तेमाल हुई.

साल 1991 में 2G टेक्नोलॉजी की शुरुआत हुई जोकि 1G एनलॉग सिस्टम पर काम करता था. वहीं, 2G पूरी तरह डिजिटल था. CDMA और GSM सिस्टम की शुरुआत इसी जनरेशन में हुई थी. 2G टेक्नोलॉजी में मोबाइल उपभोक्ताओं को रोमिंग की सुविधा मिलने लगी. उस दौर में रोमिंग की दरें बहुत अधिक होती थी. वॉयस कॉलिंग के साथ-साथ SMS व MMS जैसी डाटा सेवाओं की शुरुआत हुईं. इसकी अधिकतम स्पीड 50 kbps होती थी. 2G के दौर में भी पूरा फोकस वॉयस कॉलिंग पर रहा. लेकिन, साथ ही डाटा के इस्तेमाल की भी शुरुआत हुई. शुरुआत के 3 दशक बाद आज भी भारत में 2G मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले यूजर की अच्छी खासी संख्या है.

साल 2001 में 3G की शुरुआत हुई. 2G के मुकाबले 3G में चार गुना ज्यादा इंटरनेट स्पीड मिलने का दावा किया गया. ये वो जनरेशन थी, जिसमें मोबाइल से ही वीडियो कॉलिंग, वेब ब्राउजिंग, ईमेल, नेविगेशनल मैप और म्यूजिक का इस्तेमाल कर सकते थे. इसी दौर में दुनिया के कई देशों में ब्लैकबेरी के फोन पॉपुलर हुए. साल 2008 में एप्पल के स्टीव जॉब्स ने 3G फोन लॉन्च किया. दिसंबर 2008 में भारत में 3G को सपोर्ट करने वाले मोबाइल और डाटा सर्विस की शुरुआत हुई. सरकारी कंपनी एमटीएनएल ने पहले दिल्ली में इसे शुरू किया, फिर मुंबई में भी इसकी शुरुआत हुई. बता दें एमटीएनल भारत में 3G सेवा शुरू करने वाली पहली मोबाइल कंपनी थी. फरवरी 2009 में बीएसएनएल ने चेन्नई और कोलकाता में इसे शुरू किया, जिसके बाद इसे पूरे देश में लॉन्च किया गया.

साल 2010 के करीब भारत में जब 3G की शुरुआत हो रही थी, तब दुनियाभर में 4G टेक्नोलॉजी का आगमन हो रहा था. हाई स्पीड, हाई क्वॉलिटी, हाई कैपसिटी वॉयस और डाटा सर्विस का वादा 4G में किया गया. 3G के मुकाबले इसमें करीब 5-7 गुना ज्यादा स्पीड मिलती है.भारत में साल 2012 में एयरटेल ने पहली बार 4G डाटा सर्विस लॉन्च की. साल 2014 में एयरटेल ने एप्पल के साथ मिलकर पहली बार मोबाइल पर 4G सेवा की शुरुआत की. सितंबर 2016 में जियो के लॉन्च के बाद देश में तेजी से 4G का विस्तार हुआ.

5G: What is it? How does it work? | Samsung Semiconductor Global

बता दें कि अगर आप 4G से डाटा ट्रांसफर अगर 50 मिलीसेकंड लेता है तो 5G में इसमें महज 1 मिलीसेकंड लगेगा. ऐसा माना जा रहा है कि 5G को कम पावर की जरूरत पड़ेगी. जिससे मोबाइल फोन की बैटरी लाइफ भी कई गुना तक बढ़ जाएगी. डाउनलोड स्पीड बढ़ने के साथ ही सेलुलर बैंडविड्थ बढ़ेगी, स्पीड में इजाफा होगा और डेटा डिले भी बहुत कम हो जाएगा. सेल्फ-ड्राइविंग कार और रोबोटिक सर्जरी, स्मार्ट सिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी 5G की बड़ी भूमिका होगी. गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने पिछले साल ही 2G मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था. हालांकि भारत में जल्द ही 5G का प्रवेश होने वाला है.

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