UNHRC की पहल, मिर्जापुर मे मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस

0

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है. पर्यावरण को हम सबकि जरूरत है, और हम दोनों एक दूसरे पर आधारित है. ऐसे में हिंदी साहित्य के स्तंभ माने जाने वाले सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी कविता “तरु” में पेड़ों का बहुत ही सुंदर विवरण किया है. उन्होंने अपनी कविता में एक पेड़ की उदारता और उसकी महानता का कुछ ऐसा विवरण किया है जिसे चाहकर भी हम नहीं मिटा सकते हैं. उनकी कविता “तरु” की पंक्ति कुछ ऐसे आती है –

पर वृक्ष कभी नहीं कहते,

धरती हमारी है.

कभी नहीं कहते,

हमने दी छाया,

हमने दिए फूल.

वृक्ष सिर्फ देते हैं,

धरती पर छाया, फूल, फल,

कभी-कभी लकड़ी,

जो हम जलाकर,

अपने जीवन को आराम देते हैं. 

निराला की इस कविता में पेड़ों की संवेदनशीलता का बहुत ही अनूठा विवरण मिलता है. यह उस समय की कहानी है जब धरती पर पेड़ खुद ही संतुलन बनाए रखते थे. गौरतलब है कि इंसानों ने हमेशा पेड़ों को कम आँका है, वह जैसे चाहे उसे इस्तेमाल करता गया है. यही वजह रही कि आज धरती पर पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है. ऐसे में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पर्यावरण सरंक्षण के लिए मिर्जापुर के अहरोरा क्षेत्र स्थित लतीफपुर गांव में पौधरोपण अभियान का आयोजन हुआ.

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य था, कि गांव की महिलाओं और बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करना. बच्चों और महिलाओं को उनकी प्रकृति के बारे मे बताना बेहद जरूरी है. बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है जिसके तहत गांव के बच्चों को पौधरोपण के फायदे बताकर जागरूक किया गया जिससे वह इसके प्रति संजीदा हो सकें. बता दें कि पौधरोपण के इस पहल की शुरुआत UNHRC के चेयरमेन नवनीत पांडेय की देखरेख में हुआ. इस अभियान के तहत उन्होंने पर्यावरण के लिये पौधरोपण पर प्रकाश डाला. वहीं पर्यावरण की देखरेख के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी भी दी.

Also Read: विश्व पर्यावरण दिवस पर जानिए, Climate Change कैसे बना हीटवैव का कारण

बच्चों की तरह करें पालन-पोषण

नवनीत पांडे ने गांव की महिलाओं के बीच पौधरोपण की मुहिम चलाई जिससे गांव की महिलाओं को इसके महत्व के बारे में बताया जा सके. उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक पौधरोपण करने से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलती है. उन्होंने गांव की महिलाओं से अपील की ताकि महिलाएं पौधें लगाएं और उसकी जिम्मेदारी भी लें. पौधों की देख-रेख अपने बच्चों के पालन-पोषण की तरह करनी चाहिए. वहीं बच्चों को भी सीख दी कि पौधरोपण के साथ पर्यावरण के सरंक्षण को लेकर काम करें.

भारी संख्या में काटे जा रहे पेड़

विकास की दौड़ मे जुटें देश के आम-जनमानस भारी संख्या में पेड़ काट रहे है, और उसका नतीजा इस बार पूरे देश को दिख रहा है. हीटवेव का दौर चल रहा है, पूरे भारत में तापमान औसत से भी ज्यादा है. बहुत बड़ी संख्या में लोग अब शहरों की तरफ पलायन कर रहे है. लेकिन वह शहर बनाने में इंसान अपने ही भविष्य के साथ खेल रहा है.

पूरे देश में ग्रीन कवर एरिया कम होता जा रहा है और उसकी जगह कान्क्रीट के जंगल दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है. ऐसे में यह हम सबकी मूल जिम्मेदारी पर्यावरण के तरफ ज्यादा होनी चाहिए.

प्रदूषण ने शहर में रहने वाले लोगों का गला घोंट रखा है. लोगों के पास जरूरत से ज्यादा सामान है, और वही पर्यावरण ही नहीं बल्कि आम समाज में लोगों के बीच भेद दिख रहा है.

फूड चेन, गर्मी एवं अन्य विषयों पर की बात

नवनीत पांडेय ने जर्नलिस्ट केफे की टीम से बातचीत करते हुए कहा कि मानव जीवन के लिए पर्यावरण को अनुकूल रखना सबसे जरूरी है. देश में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि मनुष्य तो एसी और कूलर से अपने आप को बचा ले रहा है लेकिन जानवरों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी में हो रही वृद्धि, प्रकृति में रहने वाले तमाम जीव जन्तु के लिए जानलेवा है. उन्होंने बताया कि इससे फूड चेन पर असर पड़ेगा. प्रत्येक प्राणी एक दूसरे पर आश्रित होते हैं. ऐसे में प्रकृति के साथ हो रही छेडछाड का प्रभाव सभी पर पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि पर्यावरण में नकारात्मक परिवर्तन होने से जानवरों की कई प्रजातिया नष्ट हो चूँकि है जिससे प्रकृति की फूड चेन पर सीधा असर देखने को मिल रहा है जिसका खामियाजा मनुष्यों को भुगतना पड़ सकता है.

नवनीत पांडेय के बारे में

आपको बात दें कि नवनीत पांडे UNHRC के चेयरमैन है और इसके अलावा उन्हों ने पर्यावरण को लेकर कई प्रकार की पहल की है. सोशल वर्क के माध्यम से लोगों की मदद करने में वह बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है. बीतें 15 सालों में नवनीत ने देश के अलग-अलग कोने में पेड़ लगाए, और सिर्फ लगाना ही नहीं बल्कि उनके सरंक्षण को लेकर भी काम किया है जो उनकी मूल विशेषता है.

नवनीत पांडे ने इंडो-बांग्लादेश बॉर्डर पर सेना के साथ मिलकर कई प्लान्टेशन ड्राइव की है. बता दें कि सिर्फ सेना के साथ ही नहीं बल्कि पैरामिलिटरी के साथ भी उन्होंने कई ऐसी कार्यक्रम किए. नवनीत पांडे का मानना है कि सिर्फ पेड़ लगाने से ही आपका जिम्मेदारी पूरी नहीं होती है बल्कि, उन्हें बचाना और उनकी देखभाल करना भी उनकी जिम्मेदारी का एक अटूट हिस्सा रहा है, और यही विशेषता उन्हें ट्री-मैन के रूप में देखती है.

Also Read: वाराणसी में विश्व पर्यावरण दिवस पर ली पर्यावरण संरक्षण की शपथ

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More