क्या होता है ब्लैकआउट ? अचानक कैसे पैदा हो गया भारत में अप्रत्याशित बिजली संकट ?

दिवाली का त्योहार आने वाला है और ऐसे में भारत में आने वाले वक्त में अप्रत्याशित बिजली संकट खड़ा हो सकता है।

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दिवाली का त्योहार आने वाला है और ऐसे में भारत में आने वाले वक्त में अप्रत्याशित बिजली संकट खड़ा हो सकता है। कोयले की तंगी के चलते देश में ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है। कुछ राज्यों में हालात बिगडने लगे हैं, कोयले की कमी से पंजाब में हालात गंभीर हो गए हैं। आइए जानते हैं क्या होता है ब्लैकआउट? भारत में अचानक ऐसी स्थित कैसे पैदा हो गई ?

ब्लैकआउट:

बिजली उत्पादन और खपत के बीच असंतुलन के कारण  जब इलेक्ट्रिकल पावर पूरी तरह से बंद हो जाती है, तब होता है ब्लैकआउट। ब्लैकआउट केवल कुछ मिनटों तक या सबसे खराब स्थिति में कई घंटों, दिनों या हफ्तों तक हो सकता है।

अचानक ऐसी स्थित कैसे पैदा हो गई ?

भारत में 70 फ़ीसदी से अधिक बिजली कोयले से उत्पादित होती है। भारत में बिजली उत्पादन के लिए ज्यादातर पावर प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। कोयला की कमी से लेकर बिलजी उत्पादन में अचानक कमी कैसे आ गई, पावर मिनिस्ट्री ने इसके कारण गिनाए की आखिर क्यों ऐसा हुआ ?

1. भारी बारिश से कोयला का उत्पादन प्रभावित:

इस साल कोयला का उत्पादन कम होने का सबसे बड़ा कारण रहा तेज बारिश। इसकी वजह से खदानों में पानी भर गया। इसका असर बिजली बनाने के लिए कोयला स्टॉक पर पड़ा। देश में लगभग 75 फ़ीसदी बिजली उत्पादन के लिए कोयले की जरुरत को इन्हीं खदानों से पूरा किया जाता है।

2. अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ी कोयले की क़ीमत:

देश में ज़रूरत का करीब 30 फ़ीसदी से ज़्यादा कोयला आयात किया जाता है। जो कोयला 45 डॉलर प्रति टन क़ीमत से आयात किया जाता था आज उसकी क़ीमत 180 – 200 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। जिसके वजह से इसकी खरीद में दिक्कतें आई। आयातित कोयले से बिजली उत्पादन में 2019-20 के मुक़ाबले लगभग 40 फ़ीसदी तक कि कमी दर्ज की गई।

3. डिमांड में अचानक उछाल:

भारत में बिलजी उत्पादन का 25 फ़ीसदी तक इस्तेमाल उद्योगों में किया जाता है। चूंकि उद्योग सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े होते हैं, इसलिए इनको मिलने वाली बिजली को बाधित नहीं किया जा सकता। 2021 के अगस्त में 1800 करोड़ अतिरिक्त यूनिट की डिमांड आमने आई ताकि उद्योगों को भी बिजली प्रचुर मात्रा में मिल सके।

4.बिजली की मांग में आई तेज़ी:

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 2 साल के मुकाबले अगस्त से सितंबर के बीच 20 फ़ीसदी से ज़्यादा बिजली की मांग आई । साल 2019 के अगस्त से सितंबर के बीच 10,669 करोड़ यूनिट बिजली की डिमांड थी। वही 2021 में अगस्त से सितंबर के बीच बढ़कर 12,500 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई। इस वजह से बिजली उत्पादन को बढ़ाना पड़ा और कोयले की खपत ज़्यादा रही।

 

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