वंश वृद्धि के लिए यूं रखें जीवित्पुत्रिका का व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि

संतान प्राप्ति, संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए हिंदू धर्म में सालभर कई व्रत किए जाते हैं। उन्हीं में से एक है जीवित्पुत्रिका व्रत।

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संतान प्राप्ति, संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए हिंदू धर्म में सालभर कई व्रत किए जाते हैं। उन्हीं में से एक है जीवित्पुत्रिका व्रत। इसको जितिया व्रत भी कहा जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस वर्ष 29 सितंबर को जितिया व्रत मनाया जाएगा। जितिया पर्व विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है।

व्रत करने की सही तिथि:

जीवित्पुत्रिका व्रत पंचांग के अनुसार अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस व्रत को जिउतिया, जीवित्पुत्रिका, जीमूतवाहन, जितिया भी कहा जाता है। इस बार जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सितम्बर को रखा जायेगा।

इस साल के जीवित्पुत्रिका व्रत का शुभ मुहूर्त:

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अष्ठमी तिथि इस बार 28 सितम्बर 6 बजकर 16 मिनट से प्रारम्भ हो रहा। तिथि का समापन 29 सितम्बर को रात 8 बजकर 29 मिनट पर होगा। जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सितम्बर को रखा जायेगा।

जीवित्पुत्रिका व्रत क्या होता है ?

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जीवित्पुत्रिका व्रत शादी सुदा महिलाएं रख्रती है। इस व्रत में माँ अपने संतान के लम्बी आयु और स्वस्थ्य रहने की कामना करती है। साथ ही कुछ माँ यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए रखती है। जीवित्पुत्रिका व्रत तीन दिन का होता है। सप्तमी के दिन नहाय खाए के बाद अष्टमी से लेकर नवमीं के दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है। इस दिन भगवान जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित किए जाते हैं साथ ही मिट्टी या गोबर से चील या सियारिन की मूर्ति बनाते हैं। इस पावन व्रत के दिन माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। व्रत का पारण  नवमीं के दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है।

 

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