सात लाख 66 हजार रूपये के साथ पकड़ा गया झारखंड का युवक

पुलिस को बताया कि पहले मुम्बई में आर्टिफिसियल ज्वेलरी की दुकान लगाता था

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वाराणसी जंक्शन की जीआरपी ने शनिवार को कैंट रेलवे स्टेशन से झारखंड के एक युवक को सात लाख 66 हजार रुपये के साथ पकड़ा. वह बैग लेकर स्टेशन पर घूम रहा था. संदेह होने पर जीआरपी ने जांच की तो नोटों की गड्डियां मिली. पूछताछ में वह रूपयों के बाबत कोई कागजात नही दिखा सका. बाद में जीआरपी ने आयकर विभाग के अधिकारियों को बुलाकर रुपये उनकी सिपुर्दगी में दे दिया. आयकर विभाग ने आरोपित युवक को नोटिस जारी कर 10 जुलाई को जवाब देने के लिए बुलाया है.

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जीआरपी (राजकीय रेल पुलिस) के सहायक पुलिस अधीक्षक श्यामजीत ने बताया कि प्रभारी निरीक्षक हेमंत सिंह शनिवार की सुबह फोर्स के साथ चेकिंग करते प्लेटफार्म नंबर पांच स्थित फुटओवर ब्रिज पर सीढ़ी के पास पहुंचे थे. तभी वहां मौजूद संदिग्ध युवक ने सीढ़ियों के पीछे से भागने की कोशिश की. संदेह होने पर पुलिस ने युवक को पकड़कर उसकस बैग को चेक किया गया तो सात लाख 66 हजार रुपये बरामद हुए.

जीआरपी ने युवक को आयकर अधिकारियों के किया हवाले

पकड़े गए युवक ने खुद को चतरा (झारखंड) निवासी राम दर्शन प्रसाद बताया. उसने बताया कि वह मुंबई के बोरपाड़ा क्षेत्र के कस्तूरी पार्क जवल में फेरी पटरी पर आर्टिफिशियल सामान बेचता था. वहां बीएमसी का दबाव बढ़ा तो गांव लौटकर आर्टिफिशियल सामानों का होलसेल करने लगा. दिल्ली खरीदारी के लिए रूपये लेकर गया था. वहां सामान नहीं मिलने के कारण लौट रहा था. जीआरपी ने आयकर अधिकारी जांच राजेश कुमार, आयकर निरीक्षक दिलीप श्रीवास्तव और सुरेश चंद्र को बुलाया था. इंस्पेक्टर हेमंत सिंह ने बताया कि एक वर्ष में 13 संदिग्ध लोगों से दो करोड़ 98 लाख 91 हजार 459 रुपये बरामद किये गये हैं. उसे पकड़ने वाली पुलिस टीम में एसआई देवचंद्र यादव, मनोज कुमार, मुख्य आरक्षी इरशाद अंसारी, कांस्टेबल राहुल कुमार, अजीत सिंह, शिवकुमार, महेंद्र सिंह, सुयश कुमार रहे.
गौरतलब है कि इससे पहले कैंट रेलवे स्टेशन और मुगलसराय स्टेशन से करीब एक दर्जन से अधिक लोग अवैध ढंग से नोट ले जाते पकड़े गये हैं. इनमें से ज्यादातर कोलकाता और बनारस के आभूषण व्यवसायियों से जुड़े रहे. कोलकाता से बड़ी मात्रा में आभूषण और सोना वाराणसी के व्यवसायी खरीदते हैं. इसके बाद कोलकाता के व्यवसायी इनको वसूली के लिए भेजते हैं. इन रूपयों को उनके पास कोई हिसाब नही होता. क्योंकि धंधा काले कारोबार से जुड़ा है.

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